उप चुनाव विशेष: बाज़ी किसके हाथ

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लखनऊः आजकल उप चुनाव में इस बात पर बहस चल रही है कि इस प्रतिष्ठित उपचुनाव में जनता का रूझान किस तरह का है साथ ही साथ इस बात पर भी चर्चा है कि ब स पा के परम्परागत वोटर कहाँ जायेगा पिछले कुछ चुनाव पर अगर ध्यान दिया जाये तो स्तिथी काफी स्प्ष्ट हो रही है।

अब बात करते है मुख्य मुकाबले की तो मुख्य रूप से मुकाबला तीन पार्टियों में सिमट रही है जैसे बी जे पी ,कांग्रेस व सपा । गोरखपुर की बात करे तो यहां सपा ने निषाद पार्टी के मुखिया के बेटे प्रवीण कुमार निषाद को प्रत्यशी बनाया है जबकि कांग्रेस ने पूर्व मेयर प्रत्याशी विजहत करीम को उम्मीदवार बनाया है। जिन्होंने पूर्व में शहर से अच्छा वोट हासिल किया था तथा उन्हें अल्पसंख्यक समुदाय का अच्छा वोट प्राप्त हुआ था तथा रही बात सपा उम्मीदवार की तो वे काफ़ी युवा उम्मीदवार है तथा उनके साथ निषाद वोटरों के साथ यादव वोटर भी उनके साथ खड़े नजर आ रहे है।

साथ ही साथ मुस्लिम वोटर भी जा सकते हैं परंतु मुस्लिम वोटों का बंटवारा निस्चित है रही बात बी जे पी प्रत्याशी उपेंद्र शुक्ल की तो पार्टी ने ब्राह्मण प्रत्याशी देकर बड़ा दांव खेला है क्योंकि ये सीट मठ की परम्परागत सीट रही है इसलिये बी जे पी को ब्राम्हण वोटों के साथ क्षत्रिय व सैयथवार तथा अन्य पिछड़ी जातियों का वोट भी हासिल होता दिख रहा है क्योंकि वर्तमान मुख्यमंत्री योगी जी पूरे दम खम से लगे हुए हैं तथा मंदिर के प्रति लोगों की अटूट आस्था है।

एक महत्वपूर्ण बात ये भी है कि बी एस पी का वोटर भी बंटता दिखाई दे रहा है इसी प्रकार फूलपुर लोकसभा में भी तीन प्रमुख पार्टियों में घमासान है जहाँ पर सपा, बी जे पी के द्वारा पटेल जाती पर दांव खेला गया है क्योंकि वहाँ पर पटेल वोटरों की संख्या अधिक है तथा कांग्रेस ने ब्राह्मण पर दांव खेला है इस प्रकार पटेलों का वोट बंटने की पूरी संभावना है तथा ब्राह्मण वोटों पर बी जे पी अपना अधिकार समझती है जबकि कुछ वोट बटने की संभावना है बाकी सपा अपने परम्परागत वोट के दम पर मैदान मारना चाहती है ।सबसे दिलचस्प ये है कि अतीक अहमद के आ जाने से मुकाबला अति दिलचस्प होगा क्योंकि मुस्लिम वोटर के बिखराव की पूरी संभावना है जिसका नुकसान सपा को हो सकता है जबकि ब स पा का वोटर कई जगहों पर बिखरे हुए दिखायी दे रहे हैं।

धनंजय शाही (इस लेख में दिए गए सभी विचार लेख के निजी हैं।)

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