बेइज्जती का बदला लेने के लिए इस शख्स ने बना दी थी ये सुपर कार

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नई दिल्लीः दुनिया में बेहतरीन लग्जरी और स्पोर्ट्स कार बनाने वाली कंपनी लैंबॉर्गिनी के बारे में तो सभी जानते होंगे। लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि आखिर इस कार की शुरुआत कैसी हुई थी? क्यों हुई थी और किसने इस सुपरकार को बनाया था…लैंबॉर्गिनी दुनिया की सबसे ज्यादा पावरफुल और स्टाइलिश कार है। आइए जानते हैं कैसे इस कार शुरुआत हुई और कैसे बहुत कम समय में इस कार ने खुद दुनिया में खास बनाया।

फेरुचियो लैंबॉर्गिनी

लैंबॉर्गिनी बनाने वाले फेरुचियो लैंबॉर्गिनी का जन्म 28 अप्रैल, 1916 को इटली में हुआ था। फेरुचियो को बचपन से ही मशीनों को ठीक करना और उनके साथ नए-नए प्रयोग करना पसंद था। फेरुचियो इस ध्यान को देखते हुएएक टेक्निकल इंस्टीट्यूट में पढ़ने के लिए चले गए। पढ़ाई पूरी होने के बाद उनकी नौकरी Italian Royal Air Force में लग गई। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद उन्होंने एयरफोर्स की नौकरी छोड़कर ट्रैक्टर बनाने की एक छोटी सी कंपनी शुरू कर दी।

उनकी कंपनी ट्रैक्टर बनाती थी जो कि जो सेना के वाहनों को ढोने के काम करते थे। ट्रैक्टर के साथ-साथ उन्होंने एसी और हीटिंग सिस्‍टम बनाना भी शुरू कर दिया। इस तरह से फेरुचियो जल्द ही इटली के एक अमीर व्यक्ति बन गए। फेरुचियो को कारों को बहुत शौक था, इसलिए उन्होंने बहुत सी सुपरकार और लग्जरी कारें खरीदी।

यहां से शुरू हुआ सफर

फेरुचियो की सबसे ज्यादा पसंदीदा कार फेरारी 250जीटी थी और इसी कारण उन्होंने लैंबॉर्गिनी जैसी सुपरकार का आविष्कार भी कर दिया। जब फेरुचियो को फेरारी चलाते वक्त उसमें क्‍लच की दिक्कत आने लगी तो उन्होंने इसकी शिकायत फेरारी के सर्विस सेंटर पर की, लेकिन किसी ने इस दिक्कत को दूर नहीं किया। बाद में फेरुचियो ने सीधे कार की शिकायत फेरारी के मालिक एंजो फेरारी से कर दी, लेकिन एंजो ने कार की परेशानी को हल करने की जगह फेरुचियो का मजाक उड़ाया और कहा कि कार में दिक्‍कत नहीं है, बल्कि इसको चलाने वाले में दिकक्त है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा की तुम ट्रेक्‍टर-बनाने वालों को कार की क्या समझ है। फेरुचियो ने अपनी इस बेइज्जती का बदला लेने के लिए फेरारी से बेहतर स्पोर्ट्स कार बनाने की ठान थी। फेरुचियो ने कार बनाने के लिए मेहनत करनी शुरू कर दी और 1963 में अगाता बोलोनीज में लैंबोर्गिनी स्पोर्ट्स कार का निर्माण कर दिया।

पहली कार, फाइटर बुल

1963 में लैंबॉर्गिनी ने अपनी पहली स्‍पोर्ट्स कार लैंबॉर्गिनी 350जीटीवी बाजार में उतारी। जिसको लोगों ने खूब पसंद किया। लैंबॉर्गिनी ने कार का लोगो सांड रखा और आने वाले समय में कई कारों को लड़ते हुए सांडों के नाम दिया। आज तक कारों का नाम ऐसे ही रखा जाता है। 1970 तक आते-आते लैंबॉर्गिनी ने कई बेहतरीन कारों को बाजार में उतार दिया। इस दौरान लैंबॉर्गिनी का ट्रेक्टर का व्यापार हलका होने लगा था। लैंबॉर्गिनी ने मियूरा और काउंटैक को बाजार में उतारा, जिन्हें दुनिया में काफी ज्यादा पसंद किया गया।

जब बिकी लैंबॉर्गिनी कंपनी

विश्व में 1974 के दौरान तेल संकट आया तो लैंबॉर्गिनी कार की बिक्री काफी कम हो गई, क्योंकि लैंबॉर्गिनी अधिक तेल की खपत किया करती थी, उस दौरान लोग ज्यादा माइलेज देने वाली कारों को चलाना पसंद करने लगे थे। इसके बाद फेरुचियो ने लैंबॉर्गिनी कंपनी को बेच दिया, लेकिन लोगों को उस दौरान अधिक तेल की खपत करने वाली कारें बिल्कुल पसंद नहीं आ रही थी तो लैंबॉर्गिनी कंपनी के मालिक बदलते गए और अंत में 1990 में फॉक्सवैगन ने इस कंपनी को खरीद लिया और वर्तमान में इसका संचालन फॉक्सवैगन ही कर रही है। 76 वर्ष की उम्र में 28 फरवरी, 1993 को लैंबॉर्गिनी फेरुचियो की मृत्यु हो गई।

वर्तमान में लैंबॉर्गिनी ये 2 कारें भारत में बिक रही हैं।
भारत में फिलहाल लैंबॉर्गिनी के 2 मॉडल उपलब्ध हैं।
1 लैंबॉर्गिनी अवेंटाडोर
2 लैंबॉर्गिनी हुराकेन

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