इच्छामृत्यु को सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई हरी झंडी, कहा इज्जत से मरना हर इंसान का हक

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इच्छामृत्यु को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेसिया) और लिविंग विल (इच्छा मृत्यु की वसीयत) को कुछ शर्तों के साथ मान्यता दे दी है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में 5 जजों की संविधान पीठ ने यह फैसला सुनाया है। इस फैसले को सुनाने के बाद कोर्ट ने कहा कि इज्जत से मरना इंसान का हक है। कोर्ट ने कहा है कि लिविंग विल पर भी मरीज के परिवार की इजाजत जरूरी होगी। साथ ही एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम भी इजाजत देगी, जो यह तय करेगी कि मरीज का अब ठीक हो पाना नामुमकिन है।

क्या है लिविंग विल
लिविंग विल एक ऐसा लिखित दस्तावेज होता है, जिसमें संबंधित व्यक्ति यह बता सकेगा कि जब वह ऐसी स्थिति में पहुंच जाए, जहां उसके ठीक होने की उम्मीद न हो, तब उसे जबरन लाइफ सपॉर्ट सिस्टम पर न रखा जाए।

जिलाधिकारी की निगरानी में होगा लिविंग विल
लिविंग विल की प्रक्रिया जिलाधिकारी की निगरानी में होगी।

2005 में दाखिल की गई थी याचिका
एनजीओ कॉमन कॉज़ ने 2005 में याचिका दाखिल की थी। उसी पर शुक्रवार को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच ने फैसला दिया है। अमेरिका, स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड्स, बेल्जियम में यह कानून मौजूद है।

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