हमारे कुछ सामाजिक और राजनीतिक मूल्य

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जब हम बात करते है लोकतान्त्रिक मूल्यों की तो कम ही लोग होते है जो लोकतंत्र के वास्तविक स्वरुप से परिचित होते है, मुश्किल से कुछ पढ़ा लिखा तबका या वो भी नहीं क्यों की अधिकांश युवा तो अपने साथ ये स्लोगन लेकर घूमते है कि “आई हेट पॉलिटिक्स”,
ऐसे में सवाल ये है की मुगलो , अंग्रेजो से लेकर आजादी के बाद का जो भारत है इसमें रहने वाले निवासी अभी भी नौकरशाही के नीचे दबे बोझ से अपने आप को ऊपर उठा पाये है या नहीं, कुछ जगह तो ऐसे है जहाँ के लोग पुलिस और दरोगा को देख कर घरो में छुप जाते है या अपना रास्ता बदल लेते है तथा सार्वजनिक कार्यालयों में अपने किसी छोटे से छोटे काम को कराने के लीये बाबुओ को चढ़ावा चढ़ाते रहते है।
तो हम कैसे कहे की अधिकांस भारतीयों को अपने मुलाधिकारो या लोकतंत्र में समाहित मूल्यों का ज्ञान हो गया होगा, क्या उन्हें इस बात का तनिक भी ज्ञान है की लोकतंत्र में वो ही शासक है या वो ही राजा है।
क्या जो थोडा बहुत पढ़ा लिखा तबका है हम उससे ये अपेछा नहीं कर सकते की वो जागरूक लोगो को जागरूक करे ? मेरा सवाल आप से है कि क्या ये हमारी सामूहिक जिमेदारी नहीं बनती की हम उसे अपना मौलिक कर्तव्य समझ कर कुछ लोगो को जागरूक करे ? मैं ये नहीं कहता की लोकतंत्र का लंबा चौड़ा लेक्चर दिया जाये, फिर भी इतना तो जरूर उन्हें ज्ञान करा ही देना होगा की वर्तमान सामाजिक और राजनितिक परिदृश्य में उनकी अहमियत कितनी है वो जान ले और पहचान ले , जो लोग अपनी वर्तमान परिस्थितियों के लिए अपनी किस्मत को बुरा भला कहते है हम उन्हें ये क्यों नहीं समझा सकते की भारत एक कल्याण कारी देश है और सभी दीन हीन लोगो के लिए कुछ न कुछ व्यवस्थायें की गई है लेकिन अल्प ज्ञान के वजह से जो सुविधाये उन्हें मिलनी चाहिये उन्हें नहीं मिल पा रही है और अगर किसी तरह कुछ सरकारी योजनाओ का लाभ उन्हें मिल भी रहा है तो वो भी शर्तिया।
धरातल की सच्चाई बहौत अलग है इसमें कुछ लोगो को समाज के प्रति कर्तव्यनिष्ठ होना पड़ेगा और एक सुपर हीरो की तरह जरुरतमंदो की मदत करनी होगी, क्योंकि हम जो ‘सपनो के भारत’ का सपना देख रहे है वो ऐसे ही नहीं बन जायेगा इसके लिए एक एक नागरिक को अपना योगदान देना होगा तथा राष्ट्रीयता को सबसे आगे रखना होगा ताकि हम वर्ण व्यवस्था की इस पूर्वाग्रह विचार धारा से बाहर निकलकर एक सुन्दर समाज का निर्माण कर सके।
साथ ही लोकतान्त्रिक व्यवस्था को बनाये रखने के लिए लोकतंत्र के मूल्यों को जन जन तक पहुँचाना होगा।

ये पोस्ट हमारे साथी राहुल यादव द्वारा लिखी गई है।

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