कथुआ केस : पीड़िता की वकील का किया जा रहा सामाजिक रूप से बहिष्कार

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सोमवार को कथुआ मामले में पीड़िता की वकील दीपिका सिंह राजावत ने कहा कि वह अपने जीवन के लिए डर रही हैं, संवेदनशील मामले को उठाने के लिए सामाजिक रूप से उनका बहिष्कार किया जा रहा है। खबरों के अनुसार पीड़िता की वकील ने कहा “आज, मुझे नहीं पता, मैं अपने होश में नहीं हूं, मेरा बलात्कार किया जा सकता है या मुझे मार दिया जा सकता है। शायद मुझे अदालत में अभ्यास करने की अनुमति भी न मिले।”
पीड़िता की वकील ने ये आरोप लगाया है कि उन्हें एक ‘हिंदू विरोधी’ के रूप में लेबल किया जा रहा है और वह जनवरी में हत्या के शिकार बलात्कार पीड़ित के मामले को उठाने के लिए सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार राजावत ने ये भी कहा कि ” मैं ये बातें सर्वोच्च न्यायालय को बताऊंगी मुझे बुरा लग रहा है और यह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है। आप मेरी दुर्दशा को अच्छी तरह से कल्पना कर सकते हैं लेकिन, मैं न्याय के लिए खड़ी हूं और हम आठ साल की लड़की के लिए न्याय चाहते हैं। अपनी सुरक्षा के लिए बढ़ती चिंताओं के बीच खुद के साथ-साथ अपने परिवार के लिए पुलिस की सुरक्षा की भी मांग करूंगी।”
साथ ही आज बीसीआई द्वारा जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन के वकीलों के कार्यों की जांच के लिए एक पैनल का गठन किया जाएगा, ताकि उन वकीलों के बारे में पता चल सके जिन्होंने पुलिस को कठुआ बलात्कार और हत्या के मामले में आरोपपत्र दाखिल करने से रोक दिया था।
मामले के संबंध में, दो एफआईआर दर्ज किए गए हैं, एक अपराध के मामले में कथित रूप से शामिल होने के लिए आठ लोगों के खिलाफ और एक उन वकीलों के खिलाफ जिन्होंने पुलिस को आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने से रोका था।दो भारतीय जनता पार्टी मंत्री, चंद्र प्रकाश गंगा और लाल सिंह को सामूहिक बलात्कार और हत्या के आरोपियों के समर्थन में रैली में शामिल होने के आरोपों पर इस्तीफा देने को मजबूर होना पड़ा।
ये पोस्ट हमारी साथी शिक्षा द्वारा लिखी गई है।
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