ये है रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का जंग जीतने का फॉर्मूला

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दुनिया की राजनीति में इस साल दो बड़ी बातें हुई हैं। और कमाल की बात ये है, कि ये दोनों ही बातें मार्च के महीने में हुईं। पहली बात तो ये, कि चीन के मौजूदा राष्ट्रपति शी चिनफिंग का ताउम्र राष्ट्रपति बने रहने का रास्ता साफ हो गया है। और दूसरी ये कि रूस में एक बार फिर व्लादिमीर पुतिन का चौथी बार रूस का राष्ट्रपति चुना जाना। भारत और चीन के संबंध उतने बेहतर नहीं हैंलेकिन रूस के साथ भारत के रिश्ते हमशा अच्छे रहे हैं। मौजूदा वक्त में जिन हालातों में पुतिन फिर से रूस के राष्ट्रपति चुने गए हैं उससे रूस के आम निवासियों को  यही लगता है कि उन्होंने दुनिया में रूस की नाक फिर ऊंची कर दी है। बीते 18 सालों से पुतिन जिन वजहों से रूस की सत्ता पर काबिज हैं यह भी काफी रोचक है। 65 साल के पुतिन ने दुनिया को रूस की ताकत दिखलाने से कभी परहेज नहीं किया और न ही कभी दुनिया से अपनी छाप छुपाई। पुतिन जूडो में ब्लैक बेल्ट हैं और उसकी आक्रामकता उनके तेवरों में भी झलकती है। साल 2015 के अक्टूबर में एक बार पुतिन ने कहा था कि 50 साल पहले लेनिनग्राद की सड़कों ने मुझे एक नियम सिखाया था कि अगर लड़ाई होनी तय है तो पहला पंच मारो। साल1997 में पुतिन रूस के पहले राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन की सरकार में शामिल हुए, जबकि 1999 में वे खुद रूस के राष्ट्रपति बन गए। साल 2004 में पुतिन दोबारा भी रूस के राष्ट्रपति चुने गए। यहां गौर करने वाली बात ये है कि रूस के संविधान में तीसरी बार राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने का प्रावधान नहीं था तब पुतिन चुनाव लड़कर रूस के प्रधानमंत्री बने। बाद में उन्होंने रूसी संविधान में संशोधन किए और खुद के कई बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता भी साफ किया। इसी वजह से पुतिन 2012 में तीसरी बार राष्ट्रपति बने थे। और इस बार पुतिन चौथी बार दुनिया के इस सबसे बड़े क्षेत्रफल वाले देश के राष्ट्रपति बने हैं।

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