किम जोंग-उन के चीन भ्रमण के अंतर्राष्ट्रीय मायने

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किम जोंग-उन के इस दौरे से ये पता चलता है कि उसके एकमात्र सहयोगी चीन से उत्तर कोरिया का कितना गहरा संबंध है,उत्तर कोरिया का अमरीका और दक्षिण कोरिया के साथ प्रस्तावित शिखर सम्मेलन से पहले इस मुलाकात को अहम माना जा सकता है ,लोगों की नज़रें इस बात पर टिकी हुई हैं कि इस मुलाक़ात के बाद उनका अगला क़दम क्या होगा और विश्व राजनीति पर इसका क्या असर पड़ेगा।
एक अनुमान के मुताबिक़ उत्तर कोरिया के विदेशी व्यापार में चीन का हिस्सा 90 फ़ीसदी तक का है,चीन खाने-पीने की चीज़ें, तेल और औद्योगिक उपकरण का सबसे बड़ा निर्यातक है.जब भी उत्तर कोरिया पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध बढ़े हैं, चीन ने उत्तर कोरिया की मदद की है.
ये बात तो तय है की अगर अमेरिका दछिण कोरिया से बहुत करीबी बनायेगा तो उत्तर कोरिया के पास चीन से अच्छा कोई अन्य विकल्प नहीं है इन दोनों के करीब आने का  मतलब एशिया पैसिफिक में बैलेंस ऑफ़ पवार या शक्ति संतुलन करना है जिसका एक मात्र लक्ष्य एशिया में अमेरिका के बढ़ते प्रभुत्व को रोकना होगा।
चीन कभी भी अमेरिका से प्रत्यछ मतभेद नहीं करना चाहेगा परंतु उत्तर कोरिय चीन के लिए एक ऐसा परमाणु सम्पन मोहरा है जिसका उपयोग चीन अमेरिका के खिलाफ अपने हितो की पूर्ति के लिये कभी भी कर सकता है।

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