इस मामले में चीन से आगे निकला भारत, क्या यही है विकास की आहट ?

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नई दिल्ली : चालू वित्त वर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.2 फ़ीसदी दर्ज की गई।चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत एक बार फिर विश्व में सबसे तीव्र गति से विकास करने वाला देश बन गया है। चीन की विकास दर 6.8 फ़ीसदी रही। वित्तवर्ष 2017-18 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर) के दौरान सांख्यिकी विभाग के आंकड़ों के अनुसार आर्थिक विकास दर 7.2 फ़ीसदी पहुंच गई जबकि न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने 35 अर्थशास्त्रियों के हवाले से इस तिमाही में आर्थिक विकास दर 6.9 फीसदी तक रहने का अनुमान जताया था।

नोटबंदी और जीएसटी जैसे महत्वपूर्ण निर्णय के बाद कम होती आर्थिक विकास दर पर विपक्ष की ओर से सरकार को घेरने का बखूबी प्रयास किया गया लेकिन यह तिमाही मोदी सरकार के लिए एक राहत भरी खबर लेकर आई है। आर्थिक विकास दर के आंकड़ों में वृद्धि दर्ज करने में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की एक अहम भूमिका रही जिसकी विकास दर 8.1 फीसदी दर्ज की गई । चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह दर नेगेटिव हो गई थी जबकि दूसरी तिमाही में यह 6.9 फ़ीसदी तक पहुंचने में कामयाब रही थी।

भारत एक कृषि प्रधान देश है । अतः देश के किसानों को मुख्यधारा में लाए बिना आर्थिक विकास दर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा पाना बहुत मुश्किल है। इस तिमाही में कृषि के क्षेत्र में विकास दर 4.1 फ़ीसदी रही जबकि चालू वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों में यह विकास दर 2.7 फ़ीसदी तक ही थी।

प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन विवेक देवराय के अनुसार अर्थव्यवस्था सही रास्ते पर तीव्र गति से आगे बढ़ रही है। आर्थिक विकास दर में वृद्धि दिखाई दे रही है वह सरकार के आर्थिक सुधारों को बढ़ाने का ही प्रतिबिंब है। वहीं भारतीय उद्योग परिसंघ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी का कहना है कि तीसरी तिमाही में 7.2 फ़ीसदी की वृद्धि से इस धारणा को भी बल मिला है कि भारतीय अर्थव्यवस्था आर्थिक प्रगति में सतत तेजी के रास्ते पर अब पहुंच चुकी है। अभिषेक उपाध्याय जो कि ICICI में इकोनॉमिस्ट के पद पर कार्यरत हैं उनका कहना है कि इस तिमाही में सरकारी खर्च काफी ज्यादा था । प्राइवेट कंजंक्शन डिमांड में भी मजबूती देखी गई है। नई डाटा में सीमेंट आउटपुट के बढ़ने से नोटबंदी की वजह से पिछले कंस्ट्रक्शन, रियल स्टेट आदि क्षेत्रों के लिए अच्छी खबर है।

ऐसे में सरकारी अधिकारियों की माने तो आर्थिक विकास दर में लगातार हो रही वृद्धि से यह भी कहना गलत नहीं होगा कि देश की अर्थव्यवस्था नोटबंदी और जीएसटी के नकारात्मक प्रभावों से काफी हद तक उबर चुकी है। वहीं दूसरी ओर ऐसी आशंकाएं भी व्यक्त की जा रही है कि देश के बैंकिंग सिस्टम को चूना लगा रहे लोगों के ऊपर यदि सख्ती नहीं दिखाई गई तो आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका भी लग सकता है।

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