गुड फ्राइडे : आखिर क्यों दी गई थी ईसा मसीह को फांसी

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ईस्टर के ठीक पहले शुक्रवार को आता है ‘गुड फ्राइडे’, वो दिन जब ईसा मसीह को कैलवरी में सूली पर चढ़ाया गया था। ईसाई धर्म के अनुसार ईसा मसीह परमेश्वर के पुत्र थे। ईसा मसीह को “यीशु” के नाम से भी पुकारा जाता है। इस दिन ईसाई धर्म के लोग नम्रता और सम्मान के साथ प्रभु यीशु के जुनून और बलिदान को याद करते हैं।

गुड फ्राइडे एक शोक दिवस होता है लेकिन क्योंकि इस दिन ईसा मसीह की मृत्यु हुई थी इस कारण इसे “गुड फ्राइडे” कहकर संबोधित किया जाता है। इस दिन लोग दिन भर उपवास, ध्यान और प्रभु यीशु को अपनी प्रार्थनाओं के माध्यम से याद करते हैं।

यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है क्योंकि यह माना जाता है कि 33 ईसा पूर्व में मानवता की रक्षा के लिए यीशु ने शेष मानव जाति की ओर से अपने जीवन का बलिदान दिया था।

कथायों के अनुसार यीशु के बारह चेलों में से एक यहूदा था, जिसने तीस चांदी के सिक्कों के लिए धोखेबाज के साथ मिल कर उन्हें धोखा दिया था। यीशु पर आरोप लगाए गए थे कि वह पाखंड कर रहे हैं और खुद को ईश्वर का पुत्र बता रहे हैं। निन्दा के आरोप में, उन्हें मृत्यु की सजा सुनाई गई थी और दो अपराधियों के साथ क्रॉस पर चढ़ाया गया था।

प्रीस्ट द्वारा पूछताछ के दौरान, यीशु चुप थे। शपथ देते हुए प्रीस्ट ने पूछा, “मैं तुम्हें, जीवित ईश्वर के द्वारा, हमें बताने के लिए कहता हूं, कि क्या आप ईश्वर के पुत्र हैं ?” मसीह ने कहा, “आने वाले समय में तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान ईश्वर के दाहिनी ओर बैठे देखोगे, जो स्वर्ग से बादलों पर आएगा।

तीन दिन बाद, यीशु को ईस्टर यानी रविवार को मृतकों से पुनर्जीवित कराया गया था। ऐसे कई सिद्धांत हैं कि इस दिन का नाम “गुड फ्राइडे” क्यों दिया गया है। कुछ लोगों का मानना ​​है कि शब्द ‘गुड’ इस दिन की पवित्रता को दर्शाता है। जबकि अन्य लोगों का कहना है कि ‘ईश्वर’ शब्द का प्रयोग प्राचीन ग्रंथों में ‘गुड’ के साथ किया गया है।

इस दिन जीवनभर लोगों में प्रेम और विश्वास जगाने वाले प्रभु यीशु को याद किया जाता है और उनके उपदेशों को सुनाया जाता है। गुड फ्राइडे के दिन श्रद्धालु प्रेम, सत्य और विश्वास की डगर पर चलने का प्रण लेते हैं।

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