गाजा-इजरायल बॉर्डर पर प्रदर्शन, जाने क्या है पूरा मामला

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गाजा बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन 30 मार्च से शुरू हुए हैं। इस दिन फिलिस्तीन जमीन दिवस मनाये हैं। इतिहास के अनुसार इस दिन 1976 में फिलिस्तीन पर इजरायल के कब्जे के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले 6 नागरिकों को इजरायली सेना ने मार दिया था।

गाजा बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन के लिए फिलिस्तीन की ओर से 5 कैंप्स लगाए गए हैं। जिसे ‘ग्रेट मार्च ऑफ रिटर्न’ नाम दिया गया है।

शुक्रवार को हजारों फिलिस्तीनी नागरिकों ने गाजा बॉर्डर पर प्रदर्शन किया। जिसमें इजरायली सेना से झड़प में करीब 16 फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई। साथ ही करीब 2000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

खबरों के अनुसार ये विरोध प्रदर्शन 15 मई के आसपास खत्म होंगे। 15 मई का दिन फिलिस्तीन में कयामत के तौर पर मनाया जाता है। 1948 में इसी दिन इजरायल बना था, जिसके चलते हज़ारों फिलिस्तीनियों को अपने घर छोड़ने पड़े थे।

जमीन दिवस के दिन फिलिस्तीनी नागरिक बॉर्डर स्थित पांच स्थानों पर जुटे और जिनमें से ज्यादातर लोग अपने कैंप्स में ही थे। लेकिन कुछ लोग इजरायली सेना की चेतावनी के बावजूद सीमा पर हंगामा करने लगे और पेट्रोल बम और पत्थरों से हमला भी किया। जिसके बाद आईडीएफ (इजरायली डिफेंस फोर्स) को भीड़ को हटाने के लिए फायरिंग करनी पड़ी।

इजरायल की सेना गाजा बॉर्डर पर नो-गो जोन की रखवाली करती है। सेना को फिलिस्तीन के जमीन दिवस में हजारों नागरिकों के जुटने की आशंका थी। इसीलिए पहले से ही यहां सेना को बढ़ाया गया था और सतर्क रहने को कहा गया था ताकि फिलिस्तिनियों की ओर से बॉर्डर पार करने जैसी घटनाओं को रोका जा सके।

ये पोस्ट हमारी साथी शिक्षा द्वारा लिखी गई है।

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