बिप्लब कुमार के सिर सजा त्रिपुरा के सीएम का ताज

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नई दिल्ली : त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में बीजेपी की बंपर जीत की बाद शुक्रवार को बिप्‍लव कुमार देव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। समारोह में नौ मंत्रियों ने शपथ ली। राज्यपाल तथागत रॉय ने उपमुख्यमंत्री के रूप में जिष्णु देव शर्मा और अन्य मंत्री पदों पर भी विजयी विधायकों को शपथ दिलाई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा बने। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह समारोह में शामिल होने के लिए गुरुवार को ही अगरतला आ गए थे।

शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और बीजेपी के संसदीय बोर्ड के सदस्य भी शामिल हुए। त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत रॉय ने बिप्‍लव कुमार देव को मुख्यमंत्री पद और अन्य नौ विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। खास बात यह रही कि शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार भी शामिल रहे। गुरुवार को विप्लव कुमार और पार्टी नेता राम माधव खुद पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार को भी समारोह का निमंत्रण देने पहुंचे थे।

2014 में दिल्‍ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्‍ता में आने के बाद बीजेपी ने अपने आरएसएस कार्यकर्ता और जबर्दस्‍त संगठन क्षमता वाले बिप्‍लव को त्रिपुरा भेजा। उन्‍हें प्रदेश अध्‍यक्ष बनाया गया। इसी का परिणाम है कि बीजेपी को सत्‍ता मिली।

बिप्‍लव देब के मुख्‍यमंत्री बनने तक के सफर पर एक नजर

1.48 वर्षीय बिप्‍लव कुमार देव त्रिपुरा के उदयपुर से ताल्‍लुक रखते हैं। बिप्‍लव देव की पत्‍नी एसबीआई में डिप्‍टी मैनेजर हैं और उनके एक पुत्र एवं पुत्री हैं। चुनावी हलफनामे में बिप्‍लव ने अपनी कुल संपत्ति 47 लाख रुपये घोषित की है।

2. त्रिपुरा यूनिवर्सिटी से 1999 में स्‍नातक की पढ़ाई पूरी कर दिल्‍ली गए और वहां मास्‍टर डिग्री ली। दिल्‍ली में आरएसएस के थिंकटैंक कहे जाने वाले नेता केएन गोविंदाचार्य के नेतृत्‍व में प्रशिक्षण प्राप्‍त किया।

3. उस समय दिल्‍ली में आरएसएस का प्रशिक्षण ले रहे बिप्‍लव पर सुनील देवधर की नजर पड़ी। सुनील देवधर त्रिपुरा में बीजेपी के मौजूदा प्रभारी हैं। बिप्‍लव के प्रशिक्षण के समय वह त्रिपुरा में वामपंथी सरकार को हराने और बीजेपी सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रहे थे। बाद में जब बीजेपी ने उन्‍हें प्रभारी बनाया तो बिप्‍लव को राज्‍य के लोगों के सामने नए चेहरे के रूप में पेश किया गया।

4. त्रिपुरा से 15 साल बाहर रहने के बाद 2014 आम चुनावों में जब बीजेपी को सर्वाधिक छह प्रतिशत वोट मिले तो आरएसएस ने लोकल चेहरे के नाते उनको त्रिपुरा वापस भेजा। उससे पहले 15 साल वह त्रिपुरा से बाहर रहे। वहां त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनोमस डिस्ट्रिक्‍ट कौंसिल चुनावों में बीजेपी की तरफ से प्रचार कर संगठन क्षमता का परिचय दिया। इससे पार्टी को जमीनी आधार मिला और ग्रामीण अंचलों में बीजेपी पहली बार लोकप्रिय हुई।

5. सात जनवरी, 2016 को बिप्‍लव देब बीजेपी के प्रदेश अध्‍यक्ष बने और इस बार पूरा चुनाव इन्‍हीं की अगुआई में लड़ा गया। बिप्‍लव ने इस बार अगरतला स्थित बनामालीपुर सीट से चुनाव लड़ा। उससे पहले सुधींद्र दासगुप्‍ता बीजेपी के प्रदेश अध्‍यक्ष थे। वह त्रिपुरा में सर्वाधिक लंबे समय तक बीजेपी के प्रदेश अध्‍यक्ष रहे लेकिन उस दौरान पार्टी सूबे की सियासत में कोई खास जगह नहीं बना पाई।

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