लाखों लोग बने थे बेवकूफ, ऐसे हुई थी अप्रैल फूल दिवस की शुरूआत

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नमस्कार दोस्तोंखबरों के इस चौराहे पर आपका स्वागत है। दोस्तों अप्रैल फूल दिवस बस आने को ही है। इस बार ये मज़ेदार दिन रविवार के दिन पड़ रहा है। ऐसे में आप सबके पास मौका होगा इस दिन के बहाने अपनों के साथ एक मज़ेदार और यादगार लम्हे बिताने का। इस दिन वैसे भी लोग एक दूसरे के साथ किए गए हल्के-फुल्के मज़ाक का बुरा भी नहीं मानते। लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं कि आखिर क्यों और कब से अप्रैल फूल दिवस मनाने की परंपरा की शुरूआत हुई। अप्रैल फूल डे की शुरूआत हुई थी दुनियाभर में एकसाथ लाखों लोगों के बेवकूफ बनने के बाद से। दरअसल हुआ यूं कि सन 1582 में फ्रांस में पोप चार्ल्स ने उस वक्त जो कैलेंडर प्रचलन में थाउसको बंद करके नए ग्रेगेरियन कैलेंडर की शुरूआत की थी। आज हमारे और आपके घर में जो कैलेंडर है उसी को ग्रेगेरियन कैलेंडर कहा जाता है और ये कैलेंडर आज सारी दुनिया में मान्यता प्राप्त है। तो आगे की कहानी कुछ इस प्रकार है। दरअसल सन 1582 से पहले रोमन लोग नए साल को अप्रैल के दिन सेलिब्रेट करते थे। वहीं युरोपियन लोग 25 मार्य को न्यू ईयर सेलिब्रेट करते थे। इस फर्क को खत्म करने के लिए सारी दुनिया के लिए एक जैसा कैलेंडर बनाया गया था जिसे ग्रेगेरियन कैलेंडर के नाम से जाना गया। इस कैलेंडर को ग्रेगरी नाम के विद्वान ने काफी शोध के बाद बनाया था। इस कैलेंडर को सबसे पहले फ्रांस में मान्यता मिली। लेकिन कुछ देश ऐसे भी थे जिन्होंने इस कैलेंडर को खारिज कर दिया। वहीं कई देशों को तो इस कैलेंडर की पूरी जानकारी ही नहीं मिली। ऐसे में वे लोग अप्रैल को ही नया साल मनाते रहेजबकि बाकी दुनिया में नया साल जनवरी को मनाना शुरू हो चुका था। ग्रेगेरियन कैलेंडर के लॉन्च होने के कई सालों के बाद कुछ देशों में नए साल को अप्रैल को ही मनाए जाने की खबर जब बाकी दुनिया में फैली तो दुनिया ने उन देशों के लोगों को मूर्खों की श्रेणी में गिनना शुरू कर दिया। बस तभी से अप्रैल को मूर्खता दिवस कहा जाने लगा। तो दोस्तों आप भी इस बार अप्रैल फूल दिवस को मज़े से सेलिब्रेट कीजिएगा लेकिन साथ ही ये भी ध्यान रखिएगा कि आपका मज़ाक किसी को ठेस ना पहुंचा दे। मतलबसामने वाले की सहन क्षमता देखकर ही उससे कोई मज़ाक कीजिएगा। और साथ ही ऐसी और भी मज़ेदार जानकारियों के लिए खबर चौराहा को फॉलो करते रहिएगा

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