चुनावी नतीजों के बाद, त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति गिराने के बाद हिंसा, 144 लागू

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नई दिल्ली : चुनावी नतीजे के बाद त्रिपुरा में हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि बेलोनिया में स्थित रूसी क्रांतिकारी व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति को गिराने के बाद त्रिपुरा के 13 जिलों में हिंसा फैल गई। हिंसा प्रभावित जगहों पर धारा 144 लगा दी गई है। जानकारी के मुताबिक, सोमवार दोपहर को कुछ लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया। मूर्ति गिराने के दौरान भारत माता की जय के नारे भी लगाए जा रहे थे। बता दें कि त्रिपुरा में बीजेपी की जीत के बाद से राज्य में चारों तरफ तोड़फोड़ और हिंसा की खबरें आ रही हैं।

लेनिन तो आतंकवादी
इस पूरे मामले पर विवादित बयानों के लिए चर्चित सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा, ‘लेनिन तो विदेशी है, एक प्रकार से आतंकवादी है, ऐसे व्यक्ति की मूर्ति हमारे देश में क्यों? वे कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्यालय के अंदर मूर्ति रख सकते हैं और पूजा कर सकते हैं।’ वहीं दूसरी ओर केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा त्रिपुरा के राज्यपाल को कानून व्यवस्था पर नजर बनाए रखने को लेकर लिखे गए पत्र की खबरों के बीच गवर्नर तथागत रॉय के ट्विटर हैंडल पर इसका खंडन किया गया है। तथागत की ओर से ट्विटर पर लिखा गया है कि उन्हें केन्द्रीय गृहमंत्री की ओर से इस तरह का कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।

चलिए जानते हैं कौन थे व्लादिमीर लेनिन, जिनकी मूर्ति तोड़ने पर मचा हुआ है बबाल
व्लादिमीर इलीइच लेनिन (1870-1924) रूस में बोल्शेविक क्रांति का नेता एवं रूस में साम्यवादी शासन का संस्थापक थे, जिनका जन्म सिंविर्स्क नामक स्थान में हुआ था और उनका वास्तविक नाम उल्यानोव था। ये शुरू से ही क्रांतिकारी के रूप में जाने जाते थे। बताया जाता है कि उच्च योग्यता के साथ स्नातक बनने पर लेनिन ने 1887 में कज़ान विश्वविद्यालय के विधि विभाग में प्रवेश लिया था लेकिन शीघ्र ही विद्यार्थियों के क्रांतिकारी प्रदर्शन में हिस्सा लेने के कारण विश्वविद्यालय ने निष्कासित कर दिया गया।

साल 1889 में मार्क्सवादियों का संगठन बनाया
साल 1889 में उन्होंने स्थानीय मार्क्सवादियों का संगठन बनाया था और उसके बाद वो मार्क्सवादियों के एक बड़े नेता के रूप में उभरे, जिसके चलते उन्हें रूसी क्रांति के दौरान जेल भी जाना पड़ा था। उन्होंने रूसी क्रांति पर तीस से ज्यादा किताबें भी लिखी हैं।

मार्क्सवादी विचारक लेनिन
मार्क्सवादी विचारक लेनिन के नेतृत्व में 1917 में रूस की क्रांति हुई था। लेनिन की अध्यक्षता में सोवियत सरकार की स्थापना की गई थी। प्रारंभ से ही सोवियत शासन ने शांतिस्थापना पर बल देना शुरू किया। जर्मनी के साथ उसने संधि कर ली। जमींदारों से भूमि छीनकर सारी भूसंपत्ति पर राष्ट्र का स्वामित्व स्थापित कर दिया गया, व्यवसायों तथा कारखानों पर श्रमिकों का नियंत्रण हो गया और बैकों तथा परिवहन साधनों का राष्ट्रीकरण कर दिया गया।

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