23 march special

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क्रांति के लिए खूनी संघर्ष अनिवार्य नहीं है। और न ही उसमें व्यक्तिगत प्रतिहिंसा का कोई स्थान है। वह बम और पिस्तौल की संस्कृति नहीं है। क्रांति से हमारा अभिप्राय यह है कि वर्तमान व्यवस्था, जो खुले तौर पर अन्याय पर टिकी हुई है, बदलना चाहिए।”
“क्रांति से हमारा अभिप्राय अंततः एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था की स्थापना से है जिसको इस प्रकार के घातक खतरों का सामना न करना पड़े और जिसमें सर्वहारा वर्ग की प्रभुसत्ता को मान्यता हो तथा एक विश्वसंघ मानवजाति को पूंजीवाद के बंधन से और साम्राज्यवादी युद्धों से उत्पन्न होने वाली बरबादी और मुसीबतों से बचा सके।”
भगत सिंह
(भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़, पेज 63.
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